Salman khans Sikandar Movie Review in Hindi: सलमान खान की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘सिकंदर’ 30 मार्च 2025 को थिएटर्स में धमाल मचा रही है। ईद और गुड़ी पड़वा के डबल सेलिब्रेशन के साथ रिलीज हुई इस फिल्म को देखने के लिए फैंस सुबह 6 बजे से सिनेमाघरों में लाइन लगा रहे हैं। रश्मिका मंदाना के साथ सलमान की जोड़ी और एआर मुरुगादॉस का निर्देशन यह फिल्म भाईजान के लिए एक नया प्रयोग है। लेकिन क्या यह दांव कामयाब रहा? अगर आप थिएटर जाने का प्लान बना रहे हैं, तो यह रिव्यू आपके लिए है। चलिए, सिकंदर की कहानी, एक्शन और मैसेज की पड़ताल करते हैं।
Sikandar Movie Review: राजकोट से शुरू हुआ सफर
फिल्म की शुरुआत गुजरात के राजकोट से होती है, जहां संजय राजकोट (सलमान खान) को लोग आज भी राजा मानते हैं। अपनी पत्नी साईश्री (रश्मिका मंदाना) के साथ वह एक भव्य महल में रहता है। संजय का लोगों की मदद करने का जुनून उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बन जाता है, जब यह आदत उसकी बीवी की जान ले लेती है। इसके बाद संजय का सिकंदर बनने का सफर शुरू होता है। पूरी कहानी जानने के लिए आपको थिएटर का रुख करना पड़ेगा, लेकिन इतना तय है कि यह फिल्म सिर्फ एक्शन का खेल नहीं, बल्कि इमोशंस की रोलरकोस्टर भी है।
फिल्म कैसी है: मास और क्लास का मिक्स
सलमान की फिल्में (Sikandar Movie Review) अक्सर दिल से देखी जाती हैं, दिमाग को थोड़ा साइड में रखकर। लेकिन ‘सिकंदर’ में आप दोनों का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह पूरी तरह मासी फिल्म नहीं है, बल्कि एक क्लासी टच के साथ मास को भी छूती है। टाइगर 3 की तुलना में यह फिल्म अलग राह पर चलती है। कहानी में साउथ सिनेमा का फ्लेवर है चेन्नई की जगह गुजरात और तमिल की जगह हिंदी-गुजराती। एक्शन दमदार है, पर वीभत्स नहीं। एक प्रेग्नेंट महिला दर्शक ने कहा, “सलमान की फिल्मों में गंदगी नहीं होती, इसलिए सुबह भी देखने आई।” परिवार के साथ देखने लायक यह फिल्म ओवरऑल अच्छा एंटरटेनमेंट देती है।
निर्देशन और राइटिंग: कहां रही कमी?
एआर मुरुगादॉस से ‘गजनी’ जैसी उम्मीदें थीं, लेकिन कहानी में नयापन नहीं मिलता। यह साउथ की पुरानी स्क्रिप्ट का बॉलीवुड वर्जन लगती है। सलमान जैसे स्टार के लिए दमदार डायलॉग्स की कमी खलती है कोई ऐसा पंचलाइन नहीं जो फिल्म खत्म होने के बाद याद रहे। मुरुगादॉस ने विजय की फिल्मों का फॉर्मूला सलमान पर आजमाया, पर यह पुराना ढर्रा अब फीका पड़ गया। यह उनके करियर की कमजोर फिल्मों में से एक है, लेकिन सलमान की मौजूदगी इसे बचा ले जाती है। उनका यह एक्सपेरिमेंट आधा-अधूरा सही, पर पूरी तरह फेल नहीं हुआ।
एक्टिंग: सलमान का जलवा बरकरार
सलमान खान फिर से ‘लार्जर दैन लाइफ’ अंदाज में नजर आए। इमोशनल सीन में उनकी सहजता दिल जीतती है, और एक्शन में भी वह संयम रखते हैं। टाइगर 3 के रफ लुक के बाद संजय राजकोट का किरदार ताजगी देता है। रश्मिका मंदाना की एक्टिंग में सुधार है, पर डायलॉग डिलीवरी अभी ठीक-ठाक ही है। शरमन जोशी और प्रतीक पाटिल फीके रहे, जबकि सत्यराज, काजल अग्रवाल और किशोर कुमार ने अपने रोल बखूबी निभाए। सलमान ही फिल्म का असली हीरो हैं।
देखें या न देखें?
अगर आप सलमान (Sikandar Movie Review) के फैन हैं, तो ‘सिकंदर’ मिस नहीं कर सकते। डायलॉग और म्यूजिक थोड़ा निराश करते हैं, लेकिन एक्शन, एक्टिंग और सेकेंड हाफ की रफ्तार फिल्म को संभाल लेती है। ऑर्गन डोनेशन और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों को उठाना इसे खास बनाता है। ईद और गुड़ी पड़वा की खुशी के साथ सलमान का यह तोहफा थिएटर में स्वागत के काबिल है। हमारी रेटिंग—3.5 स्टार।