Life is an infinite flow: आचार्य दीप चन्द भारद्वाज। जीवन एक अनंत प्रवाह है जो सदा सर्वदा प्रवाहित होता रहता है। भौतिक शरीर के नष्ट हो जाने पर भी जीवन का अंत नहीं होता। जीवन अमर है इसका कभी नाश नहीं होता केवल जीवात्मा इस स्थूल लोक को त्याग कर नए जीवन क्रम में प्रवेश करता है। यह यात्रा उसकी अनवरत जारी रहती है।
केवल भौतिक शरीर के नष्ट हो जाने पर उससे जुड़ी सारी बातें नष्ट (Life is an infinite flow) हो जाती हैं ऐसा मानना पूर्ण रूप से असत्य है। एक जीवन की सारी बातें दूसरे जीवन में उसके साथ यथावत सूक्ष्म संस्कारों के रूप में जाती हैं और अपनी गतिविधियां निर्धारित करती हैं।
Life is an infinite flow: जीवन एक अनंत प्रवाह
Life is an infinite flow: हमारा वर्तमान जीवन केवल वर्तमान की ही वस्तु नहीं है। हमारा जीवन पहले भी था और आगे भी रहेगा। मनुष्य का प्रत्यक्ष जीवन इस स्थूल लोक से प्रारंभ होता दिखता आवश्यक है किंतु वह वस्तुतः पहले से ही चला आ रहा है।
यह स्थूल भौतिक शरीर जिसके छूट जाने को हम जीवन का अंत मान लेते हैं यह केवल सूक्ष्म शरीर जिसे वास्तविक शरीर कहा जाता है उसका ऊपर का आवरण मात्र है। हमारा स्थूल शरीर जो क्रियाकलाप करता है वह उसे सूक्ष्म शरीर की क्रिया होती है।
यह सारी सूक्ष्म क्रियाएं स्थूल शरीर के माध्यम से प्रकट होती हैं जिस प्रकार छिलके के भीतर अनाज का दाना धीरे-धीरे विकसित होकर पकता रहता है और जब वह पूरी तरह पक जाता है तो बाहर निकल जाता है जिससे ऊपर का छिलका बेकार हो जाता है।
हमारे आध्यात्मिक ग्रन्थों का चिंतन
Life is an infinite flow: इसी प्रकार सूक्ष्म शरीर के पूर्ण विकसित हो जाने पर अथवा परमात्मा तत्व को आत्मसात कर लेने पर स्थूल शरीर अपने पंच भौतिक तत्वों में विलीन हो जाता है।
हमारे आध्यात्मिक ग्रन्थों का चिंतन है कि जीवात्मा की यात्रा इतनी लंबी है कि इसे अनेक बार स्थूल शरीर का कलेवर धारण करना पड़ता है। जीवात्मा के द्वारा इस शरीर के माध्यम से किए गए कर्मों के आधार पर उसकी शरीर धारण करने की यात्रा यथावत जारी रहती है।
ईश्वर को प्राप्त करने के लिए जीवात्मा जीवन के अनंत प्रवाह में प्रवाहित होता रहता है। इस विशाल यात्रा के दौरान जीवात्मा अनेक शरीरों का आश्रय लेता है।
जब जीवात्मा अपने परम लक्ष्य परमात्मा को प्राप्त कर लेता है तब इसका यह अनंत प्रवाह विराम ग्रहण करता है और ईश्वर के आनंद की अनुभूति में मग्न हो जाता है।
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